निर्मल पांडेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल में सिनेमा, कला और संस्कृति का संगम

मोना सेन बोलीं- छत्तीसगढ़ी फिल्मों ने प्रदेश को दिलाई पहचान, अनुज शर्मा ने सिनेमा को बताया समाज की सोच प्रभावित करने वाला प्रभावी माध्यम
रायपुर। दिवंगत अभिनेता, गायक एवं निर्देशक निर्मल पांडेय की स्मृति में आयोजित 7वें निर्मल पांडेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल-2026 में दो दिनों तक सिनेमा, कला, संस्कृति और रंगमंच का संगम देखने को मिला। शांति नगर स्थित विमतारा ऑडिटोरियम में 10 और 11 अगस्त को आयोजित फिल्म फेस्टिवल में देशभर से पहुंचे कलाकारों, फिल्मकारों और कला जगत से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में लघु फिल्मों, छात्र फिल्मों और फीचर फिल्मों के प्रदर्शन के साथ कलाकारों का सम्मान, मास्टर क्लास, पैनल चर्चा एवं संवाद सत्र आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, पद्मश्री एवं विधायक अनुज शर्मा, ‘भाभी जी घर पर हैं’ फेम अभिनेता रोहिताश गौड़, अभिनेता संजय बत्रा सहित बॉलीवुड, छॉलीवुड , रंगमंच और कला जगत से जुड़े कई कलाकार उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ी फिल्मों ने दिलाई प्रदेश को पहचान : मोना सेन
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने कहा कि प्रदेश के कई कलाकारों ने अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ी फिल्मों को समर्पित किया है। इन्हीं कलाकारों और फिल्मों के प्रयास से छत्तीसगढ़ को अपनी अलग पहचान मिली है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘कहि देबे संदेश’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर से छॉलीवुड लगातार अपनी पहचान बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ी सिनेमा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब बड़े बजट की फिल्में बन रही हैं और लगातार फिल्मों का निर्माण हो रहा है। प्रदेश में हर महीने करीब 5 से 6 फिल्में रिलीज हो रही हैं।
मोना सेन ने कहा कि उन्हें छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाले करीब आठ महीने हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान कलाकारों के हित में अपने स्तर पर प्रयास किए गए हैं और अपने तीन महीने का भुगतान कलाकारों को बांटा है। उन्होंने कहा, “मैं खुद कलाकार रही हूं, इसलिए कलाकारों की समस्याओं और उनके दर्द को महसूस करती हूं।” उन्होंने कलाकारों के सहयोग के लिए अपनी ओर से 51 हजार रुपये देने की घोषणा भी की।
भारतीय समाज पर सिनेमा का गहरा प्रभाव : अनुज शर्मा
पद्मश्री सम्मानित एवं विधायक और छत्तीसगढ़ी सिनेमा के स्टार कलाकार अनुज शर्मा ने कहा कि भारतीय मानसिकता को प्रभावित करने वाली कई महत्वपूर्ण चीजें हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले धर्म का प्रभाव है, इसके बाद सिनेमा लोगों की सोच और मानसिकता को प्रभावित करता है। इसके बाद राजनीति और क्रिकेट भी भारतीय समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज, संस्कृति, भाषा और विचारों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। क्षेत्रीय सिनेमा के माध्यम से स्थानीय भाषा और संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है।
सरगुजा के स्थानीय कलाकारों को मंच देने का प्रयास : डॉ. डी.के. सोनी
कार्यक्रम में सरगुजा सीने आर्ट एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. डी.के. सोनी ने कहा कि सरगुजा में स्थानीय कलाकारों को मंच और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में वे लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरगुजा में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता सिर्फ उन्हें उचित मंच और प्रोत्साहन देने की है।
डॉ. सोनी ने कहा कि वे अपने प्रोडक्शन के सहयोग से आगे भी कलाकारों के हित में काम करते रहेंगे। उनका प्रयास रहेगा कि सरगुजा के स्थानीय कलाकारों को फिल्म, कला और संस्कृति के बड़े मंचों से जोड़ने के अवसर मिलें और उनकी प्रतिभा को प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा के साथ सरगुजा की स्थानीय कला, संस्कृति और कलाकारों को बढ़ावा देना भी जरूरी है। ऐसे आयोजन नए कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ अनुभवी कलाकारों से सीखने का अवसर देते हैं।
रोहिताश गौड़ समेत कई कलाकार रहे आकर्षण का केंद्र
दो दिवसीय आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ‘भाभी जी घर पर हैं’ के चर्चित किरदार तिवारी जी के रूप में लोकप्रिय अभिनेता रोहिताश गौड़ विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उनके अलावा अभिनेता संजय बत्रा सहित बॉलीवुड, हॉलीवुड और रंगमंच से जुड़े कलाकारों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए और फिल्म एवं कला के क्षेत्र में नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। फिल्म निर्माण, अभिनय, निर्देशन और कला से जुड़े विषयों पर संवाद भी हुआ।
लघु फिल्मों और फीचर फिल्मों का प्रदर्शन
फिल्म फेस्टिवल में दोनों दिनों में लघु फिल्मों, छात्र फिल्मों और फीचर फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘भूलन द मेज़’ का विशेष प्रदर्शन भी हुआ। इसके बाद फिल्म के निर्देशक मनोज वर्मा के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
दूसरे दिन प्रसिद्ध फीचर फिल्म ‘शेन टू पाकिस्तान’ का विशेष प्रदर्शन हुआ। विद्यार्थियों के लिए अभिनेता रिजत कपूर की मास्टर क्लास आयोजित की गई। साथ ही पैनल चर्चा, इंटरैक्टिव सत्र और कलाकारों के साथ विशेष संवाद भी हुआ।
संगीत और लोक संस्कृति की भी दिखी झलक
कार्यक्रम के दौरान ऑल इंडिया आर्टिस्ट एसोसिएशन, शिमला की ओर से शास्त्रीय एवं लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। संगीत निर्देशक अमोद कृष्ण भट्ट एवं गायिका शुभश्री भट्ट ने दिवंगत निर्मल पांडेय के संगीत एलबम ‘जज्बा’ तथा उनके निर्देशित नाटक ‘अंधायुग’ के गीतों के माध्यम से उन्हें संगीतमय श्रद्धांजलि दी।
फिल्मों और कलाकारों को किया गया सम्मानित
फेस्टिवल के समापन अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में चयनित फिल्मों और कलाकारों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए गए। आयोजकों ने कहा कि निर्मल पांडेय की स्मृति में आयोजित यह फिल्म फेस्टिवल केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं, बल्कि नए फिल्मकारों, कलाकारों और विद्यार्थियों को मंच देने की पहल भी है।
दो दिनों तक चले इस आयोजन में सिनेमा, रंगमंच, संगीत और कला से जुड़े दिग्गजों की मौजूदगी ने इसे यादगार बना दिया। आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ी सिनेमा के साथ स्थानीय कलाकारों और क्षेत्रीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।




