Jannah Theme License is not validated, Go to the theme options page to validate the license, You need a single license for each domain name.
छत्तीसगढ़
Trending

ईओडब्ल्यू ने पूर्व आईएएस समेत कई बड़े लोगों के ठिकानों पर मारा छापा…

रायपुर । ईओडब्लू ने बकारी घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 बड़े लोगों के ठिकानों पर दबिश दी है। ईओडब्ल्यू ने जिन लोगों के ठिकानों पर दबिश दी है इनमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढँड, पूर्व आईएएस निरंदास दास, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, सरकारी शराब कंपनी के पूर्व एमडी अरुण पति त्रिपाठी, आबकारी अधिकारी सौरभ बख्शी, अशोक सिंह, अरविंद सिंह, सिद्धार्थ सिंघानिया, अनवर ढेबर और नोएडा में विदु गुप्‍ता शामिल हैं।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ के तीनों बड़े डिस्टिलरी केडिया, वेलकम और भाटिया ग्रुप के ठिकानों पर भी ईओडब्लू की टीम पहुँची है। अरुण पति चूंकि जेल से निकलने के बाद से ग़ायब हैं। सो ईओडब्लू की टीम उनके घर के बाहर बैठी है। ईओडब्लू के अफ़सरों ने बताया कि 150 अफ़सरों की टीम इस छापे के लिए लगाई गई है। इससे पहले विशेष न्यायाधीश निधि शर्मा की कोर्ट से ईओडब्लू ने सर्च वारंट लिया और तड़के 14 ठिकानों पर धमक गई। बता दे, ईड़ी के प्रतिवेदन पर ईओडब्लू ने केस दर्ज किया था, उसी मामले में आज कार्रवाई हुई है। एसीबी- ईओडब्‍ल्‍यू की टीम ने होलोग्राम सप्‍लाई करने वाली मेसर्स प्रिज्‍म होलोग्राफी सिक्‍योरिटी फिल्‍म्‍स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर भी दशिब दी है। ब

नोएडा में भी एफआईआर
बताते चलें कि ईडी की तरफ से पिछले साल जुलाई में नोएडा में भी एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें आबकारी विभाग के सचिव व विशेष सचिव समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह एफआईआर नोएडा के कसाना थाना में आईपीसी की धारा 420, 468, 471, 473 और 120 बी के तहत दर्ज किया गया है। इस एफआईआर में ईडी की तरफ से नोएडा की कसाना पुलिस को बताया गया है कि ईडी की तरफ से छत्‍तीसगढ़ में शराब घोटला की जांच की जा रही है। इस जांच में ईडी को यह पता चला है कि नोएडा स्थित मेसर्स प्रिज्‍म होलोग्राफी सिक्‍योरिटी फिल्‍म्‍स प्राइवेट लिमिटेड को नियम विरुध्‍द तरीके से टेंडर दिया गया था, जबकि कंपनी टेंडर में शामिल होने के लिए पात्र ही नहीं थी। इसके बावजूद कंपनी ने छत्‍तीसगढ़ के आबकारी विभाग के अफसरों के साथ मिलकर टेंडर हासिल कर लिया। आरोप है कि छत्‍तीसगढ़ के अफसरों ने इस मामले में आठ पैसा प्रति होलोग्राम कमीशन लिया। एफआईआर में होलोग्राफी कंपनी के एमडी विदु गुप्‍ता का भी नाम है।

बता दें की ईडी के पत्र के आधार पर एसीबी ईओडब्ल्यू ने इसी साल जनवरी में एफआईआर दर्ज किया है। ईडी की सूचना के आधार पर ईओडब्‍ल्‍यू में दर्ज एफआईआर में अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को शराब घोटाला का मास्‍टर माइंड बताया गया है। एफआईआर में शामिल बाकी आईएएस व अन्‍य सरकारी अफसर और लोग सहयोगी की भूमिका में थे। शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्‍सा इन्‍हीं तीनों को जाता था। टुटेजा आईएएस अफसर हैं, जब यह घोटाला हुआ तब वे वाणिज्‍य एवं उद्योग विभाग के संयुक्‍त सचिव थे। दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए त्रिपाठी आबकारी विभाग के विशेष सचिव और छत्‍तीसगढ़ मार्केटिंग कार्पोरेशन के एमडी थे। वहीं, ढेबर कारोबारी हैं। एफआईआर के अनुसार ढेबर और टुटेजा ने मिलकर पूरी प्‍लानिंग की थी।

इन लोगों ने परिवार के सदस्‍यों के नाम पर किया निवेश
एफआईआर के अनुसार अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर ने शराब घोटाला से प्राप्‍त रकम को अपने परिवार वालों के नाम पर निवेश किया। टुटेजा ने अपने बेटे यश टुटेजा के नाम पर निवेश किया। वहीं, त्रिपाठी ने अपनी पत्‍नी अपनी पत्‍नी मंजूला त्रिपाठी के नाम पर फर्म बनाया जिसका नाम रतनप्रिया मीडिया प्रइवेट लिमिटेड था। वहीं, ढेबर ने अपने बेटे और भतीजों के फर्म में पैसे का निवेश किया।

एफआईआर में छत्‍तीगसढ़ के पूर्व मुख्‍य सचिव विवेक ढांड का भी नाम है। ढांड पर टुटेजा, त्रिपाठी और ढेबर के शराब सिंडीकेट को संरक्षण देने का आरोप है। इसके लिए ढांड को सिंडीकेट की तरफ से राशि भी दी जाती थी। रिपोर्ट के अनुसार इस बात का खुलासा 2020 में ढांड के यहां आयकर विभाग के सर्च के दौरान मिले दस्‍तावेजों से हुआ है।

कवासी लखमा, सचिव दास को इतना मिलता था कमीशन
प्रदेश में बड़े स्‍तर पर हुए शराब घोटाला में तत्‍कालीन विभागीय मंत्री कवासी लखमा को हर महीने 50 लाख रुपये हिस्‍सा मिलता था। एफआईआर के अनुसार लखमा के साथ ही विभागीय सचिव आईएएस निरंजन दास को भी सिंडीकेट की तरफ से 50 लाख रुपये हर महीने दिया जा रहा था।

bulandmedia

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button