छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वरिष्ठता के दम पर नहीं मिलेगा उच्च पद का प्रभार, प्रशासनिक योग्यता भी जरूरी

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी कर्मचारी को उच्च पद का प्रभार पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। उच्च पद का अस्थायी प्रभार सौंपते समय प्रशासन को संबंधित कर्मचारी की प्रशासनिक उपयुक्तता, कार्यक्षमता और सेवा रिकॉर्ड जैसे पहलुओं पर भी विचार करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की याचिका खारिज करते हुए की है।
मामला गरियाबंद जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पद के प्रभार से जुड़ा था। छुरा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी किशुन लाल मटावाले ने सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनसे कनिष्ठ राजेश चंद्राकर को गरियाबंद DEO का प्रभारी बनाया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह संबंधित संवर्ग में वरिष्ठ हैं और आवश्यक अर्हता तथा सेवा अवधि भी पूरी करते हैं, इसलिए उन्हें उच्च पद का प्रभार दिया जाना चाहिए था।
याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु ने की। हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2026 के अपने आदेश में कहा कि किसी उच्च पद का प्रभार सौंपना नियमित पदोन्नति के समान नहीं होता। यह सामान्यतः एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था होती है। ऐसे प्रभार के लिए सरकार को केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि अधिकारी की प्रशासनिक उपयुक्तता और उसके सेवा रिकॉर्ड सहित अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों पर विचार करने की गुंजाइश रहती है।
मामले में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता मूल रूप से प्राचार्य के पद पर पदस्थ हैं और प्रभारी BEO के रूप में कार्य कर रहे थे। सरकार की ओर से यह भी अदालत के सामने रखा गया कि गरियाबंद कलेक्टर ने पहले उनके संबंध में कथित लापरवाही और सरकारी नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। अदालत ने मामले के उपलब्ध रिकॉर्ड और सरकार के निर्णय को देखते हुए इसमें ऐसी कोई अवैधानिकता या मनमानी नहीं पाई, जिसके आधार पर प्रभारी DEO की नियुक्ति को रद्द किया जा सके।
हाईकोर्ट ने क्या साफ किया?
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि वरिष्ठता अपने आप में उच्च पद का प्रभार पाने का अटूट अधिकार नहीं है। यानी किसी कर्मचारी का दूसरे कर्मचारी से वरिष्ठ होना महत्वपूर्ण जरूर हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर सरकार को उसे उच्च पद का प्रभार देना अनिवार्य नहीं है। प्रशासनिक व्यवस्था में पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए उपयुक्तता और अन्य संबंधित परिस्थितियों को भी देखा जा सकता है।
हालांकि, इस फैसले को नियमित पदोन्नति के हर मामले पर लागू होने वाला सामान्य नियम समझना उचित नहीं होगा। वर्तमान मामला विशेष रूप से उच्च पद के अस्थायी/प्रभारी प्रभार से संबंधित था। हाईकोर्ट ने इसी संदर्भ में वरिष्ठता को अकेला निर्णायक आधार मानने से इनकार किया है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
सरकारी विभागों में कई बार किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुपस्थिति, पद रिक्त होने या प्रशासनिक आवश्यकता के कारण किसी अधिकारी को उच्च पद का अतिरिक्त या प्रभारी दायित्व सौंपा जाता है। ऐसे मामलों में वरिष्ठता को लेकर विवाद भी सामने आते हैं। यह फैसला स्पष्ट करता है कि प्रभारी व्यवस्था में सरकार को प्रशासनिक जरूरत और अधिकारी की उपयुक्तता को ध्यान में रखने की गुंजाइश है।








