महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता, जून में खुदरा महंगाई 4.38% पहुंची; 12 अगस्त को आएगा जुलाई का आंकड़ा

नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026। देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। रोजमर्रा के खर्च और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव के बीच अब बाजार से लेकर आम परिवारों तक की नजर जुलाई 2026 के खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर टिकी है। जून में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत पहुंच गई थी, जबकि खाद्य महंगाई दर 5.32 प्रतिशत दर्ज की गई। अब जुलाई का आधिकारिक आंकड़ा 12 अगस्त 2026 को जारी किया जाना है।

जून में बढ़ी खुदरा महंगाई
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक CPI आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई 4.38 प्रतिशत रही। मई में यह करीब 3.9 प्रतिशत के स्तर पर थी। यानी जून में महंगाई दर में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिली।
महंगाई में यह बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि का लक्ष्य 4 प्रतिशत है। जून की CPI महंगाई इस लक्ष्य से ऊपर रही, हालांकि यह RBI के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर है।
खाद्य महंगाई ने बढ़ाई चिंता
आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चिंता खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर रहती है। जून 2026 में खाद्य महंगाई 5.32 प्रतिशत रही। इसका सीधा संबंध घर के मासिक बजट से है, क्योंकि खाद्य सामग्री रोजमर्रा के खर्च का बड़ा हिस्सा होती है।
खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मौसम और कृषि उत्पादन की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जुलाई में असमान बारिश के कारण कुछ कृषि क्षेत्रों में उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। Reuters के अर्थशास्त्रियों के सर्वे में भी जुलाई की महंगाई बढ़ने की संभावना जताई गई है।

जुलाई की महंगाई कितनी होगी?
अभी 10 अगस्त 2026 तक जुलाई 2026 की आधिकारिक खुदरा महंगाई दर सामने नहीं आई है। इसलिए जुलाई को लेकर किसी भी आंकड़े को अंतिम सरकारी आंकड़ा बताना सही नहीं होगा।
Reuters के अर्थशास्त्रियों के सर्वे के मुताबिक जुलाई की खुदरा महंगाई 4.50 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो जुलाई लगातार दूसरा महीना होगा जब CPI महंगाई RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर रहेगी। लेकिन अंतिम तस्वीर 12 अगस्त को सरकारी आंकड़े जारी होने के बाद ही साफ होगी।
RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा
महंगाई के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। RBI ने अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन पर नजर रख रहा है।
आने वाले महीनों में अगर खाद्य कीमतों और दूसरी वस्तुओं की कीमतों में लगातार दबाव बना रहता है, तो महंगाई RBI के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि महंगाई के कारण ब्याज दरों में निश्चित रूप से बदलाव होगा।

आम आदमी की जेब पर क्या असर?
महंगाई बढ़ने का असर हर परिवार पर एक जैसा नहीं पड़ता। जिस परिवार के खर्च में भोजन, परिवहन और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं का हिस्सा ज्यादा है, उसके बजट पर कीमतों में बढ़ोतरी का असर अपेक्षाकृत अधिक महसूस हो सकता है।
अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार तेजी रहती है, तो परिवारों को अपनी मासिक आय का बड़ा हिस्सा आवश्यक वस्तुओं पर खर्च करना पड़ सकता है। इसका असर बचत और गैर-जरूरी खर्चों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि CPI महंगाई एक औसत सूचकांक है। इसका मतलब यह नहीं है कि देश में हर वस्तु की कीमत 4.38 प्रतिशत बढ़ी है। अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में अलग-अलग बदलाव होते हैं और हर परिवार पर वास्तविक प्रभाव उसके खर्च के पैटर्न पर निर्भर करता है।

अब 12 अगस्त पर टिकी नजर
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तारीख 12 अगस्त 2026 है। इसी दिन जुलाई के CPI आंकड़े सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जून में बढ़ा महंगाई का दबाव जुलाई में कितना कायम रहा।
अगर जुलाई की महंगाई 4.50 प्रतिशत के अनुमान के आसपास रहती है, तो यह लगातार दूसरे महीने RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर होगी। दूसरी ओर, यदि सरकारी आंकड़ा अनुमान से कम आता है तो यह महंगाई के दबाव में नरमी का संकेत भी हो सकता है।
निष्कर्ष
भारत में महंगाई को लेकर फिलहाल सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि जून में खुदरा महंगाई 4.38 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 5.32 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई का आधिकारिक आंकड़ा अभी आना बाकी है। बाजार में जुलाई की CPI महंगाई 4.50 प्रतिशत रहने का अनुमान जरूर लगाया जा रहा है।





