
रायपुर, 10 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में बस यात्रियों के किराए को लेकर एक बार फिर मामला गरमा गया है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने बस किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। बस संचालकों का कहना है कि डीजल की कीमतों के साथ बसों के रखरखाव, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य संचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मौजूदा किराए पर बसों का संचालन मुश्किल हो रहा है।
किराया बढ़ाने की मांग क्यों?
यातायात महासंघ का तर्क है कि बस संचालन की लागत में पिछले कुछ समय में लगातार वृद्धि हुई है। खासकर ईंधन, टायर, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों का असर बस संचालकों पर पड़ रहा है। इसी आधार पर महासंघ सरकार से यात्री किराए की समीक्षा कर उसे बढ़ाने की मांग कर रहा है।
सरकार के सामने रखी गई मांग
बस ऑपरेटरों की ओर से परिवहन विभाग और सरकार के समक्ष किराया बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया है। महासंघ ने मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन का रुख अपनाने की चेतावनी भी दी थी। इससे आने वाले दिनों में बस किराए को लेकर सरकार और बस संचालकों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।

यात्रियों पर पड़ सकता है असर
अगर सरकार बस किराए में बढ़ोतरी को मंजूरी देती है, तो इसका सीधा असर रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से जिला मुख्यालयों तथा बड़े शहरों तक आने-जाने वाले यात्रियों पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।
फिलहाल मुख्य मुद्दा बस संचालकों की ओर से किराया बढ़ाने की मांग है। नई दरें लागू होने की पुष्टि के लिए सरकार की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार जरूरी है।

निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ में बस किराया बढ़ाने की मांग ने फिर जोर पकड़ा है। यातायात महासंघ बढ़ती संचालन लागत का हवाला देकर सरकार से किराए की समीक्षा की मांग कर रहा है। अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है।

